✍ रवि कुमार “राम आव्या जंगल मां, लक्ष्मण संग चाल्या। शबरी माय बेर लई, प्रेम थी थाळ भराल्या॥” “मीठा बेर चाखी-चाखी, राम ने अर्पण काया।…
✍ रवि कुमार “राम आव्या जंगल मां, लक्ष्मण संग चाल्या। शबरी माय बेर लई, प्रेम थी थाळ भराल्या॥” “मीठा बेर चाखी-चाखी, राम ने अर्पण काया।…