सा विद्या या विमुक्तये
– डॉ. सुनीता कुमारी गुप्ता कई दिनो तक चूल्हा रोया, चक्की रही उदास। चमक उठी घर भर की आखें, कई दिनों के बाद। मानव के…
✍ दिलीप वसंत बेतकेकर असीम विद्या, अल्प समय है झर झर ऐसा दौड़ेगा, वीर कितने हो न तुम, अंत तो आ ही जायेगा!! ये पंक्तियां…
– डॉ. मनमोहन वैद्य भारत के सिवा दुनिया में शायद ही ऐसा कोई देश होगा जहां के समाज के मन में “हम कौन हैं? हमारे…