स्यामा काकी की तीज की कथा – हूँ…

– किसलय पंचोली आज सांगली गांव की पुरखन श्यामा बाई चौधरी को जरा फुर्सत नहीं है। भला हो भी कैसे? वे पूरे गांव में, मतलब…