धरती आबा बिरसा मुंडा

– ऋचा सिंह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में ऐसे कई महानायक हुए हैं जिन्होंने अंग्रेजों और अंग्रेजी सत्ता को सीधी चुनौती देकर स्वतंत्रता सेनानियों के लिए…

स्वदेशी एवं वैश्वीकरण के बीच सामंजस्य चाहते थे श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी

– प्रहलाद सबनानी श्री दत्तोपंत जी ठेंगड़ी का जन्म 10 नवम्बर 1920 को, दीपावली के दिन, महाराष्ट्र के वर्धा जिले के आर्वी नामक ग्राम में…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग पांच (भारतीय दर्शन और शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव दर्शन का संबंध जगत मानव और प्रकृति के वास्तविक स्वरूप को समझने से है। यह जगत क्या है? उसका सृष्टि में…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग चार (पुरुषार्थ चतुष्टय की शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव भारतीय ज्ञान के क्षेत्र में पुरुषार्थ चतुष्ट्य का विशेष महत्व है। पुरुषार्थ चतुष्टय मानव जीवन के चार सदस्यों को संदर्भित करते…

पायौ जी मैंने राम रतन धन पायौ..

– ऋचा चारण राजस्थान की धरा केवल वीरता की गाथाओं से ही नहीं गूँजती, बल्कि उसमें भक्ति की मधुर वीणा भी अनहद नाद करती है।…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग तीन (अन्तःकरण व उसकी शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव करण अर्थात् उपकरण या साधना। ज्ञान प्राप्त करने के दो साधन है। 1. बाह्य करण 2. अन्तः करण। ज्ञानेन्द्रियां कर्मेन्द्रियां बाह्य…

सिद्ध शिरोमणि बाबा मस्तनाथ (सन् 1707-1807)

– प्रोफेसर बाबूराम (डी.लिट्.) आपगा, दृषद्वती और सरस्वती देव-नदियों के मध्य बसे क्षेत्र को हरियाणा कहा जाता है। इस क्षेत्र को आदि सृष्टि का जनक…

भारतीय शिक्षा के आध्यात्मिक आधार – भाग दो (उपनिषद् एवं शिक्षा)

– ब्रज मोहन रामदेव वैदिक वांग्मय के अनुसार वेद का अर्थ बोध या ज्ञान है। विद्वानों ने संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक तथा उपनिषद् इन चारों के…

नर गंधर्व पंडित लखमीचंद जी

– डॉ. सुभाष शर्मा भारत का जीवन लोक परंपराओं में ही दिख जाता है। इन लोक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाने का काम लोक नर्तक,…

महामनीषी श्रद्धेय लज्जा राम तोमर

 – राजेन्द्र सिंह बघेल होनहार बिरवान मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के बघपुरा ग्राम में 21 जुलाई 1930 को एक कृषक परिवार में श्री लज्जाराम…