भारतीय ज्ञान परंपरा

✍ गोपाल माहेश्वरी “गुरुदेव! प्रणाम।” अनिरुद्ध ने बैठक कक्ष में प्रवेश कर सामने बैठे हुए अपने शिक्षक विद्वांस जी के चरण स्पर्श किए। “आओ आओ…