सा विद्या या विमुक्तये
– डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया ! यह पत्र आपके हाथों में पहुंचने तक आधा ग्रीष्मावकाश बीत चुका होगा। अवकाश शायद आपके लिए कितना आनंददायक…