सा विद्या या विमुक्तये
✍ मुखतेज बधेशा 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में जन्मे मेजर ध्यानचंद का हॉकी के खेल में पूरी दुनिया में कोई सानी नहीं था, उन्होंने…
– शिव कुमार शर्मा ‘शरीरमाद्य खलु धर्मसाधनम्’ हमारी परम्परा में एक महत्वपूर्ण उक्ति है। धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष रूपी पुरुषार्थ की प्राप्ति का साधन…
– अरविंद कुमार “पढ़ोगे लिखोगे, बनोगे नवाब । खेलोगे कूदोगे, बनोगे खराब ।।” कहावत आपने जरूर सुनी होगी । इस कहावत का सीधा-सा मतलब यह…