आचार्य विनोबा भावे और उनकी शिक्षक दृष्टि

✍ सचिन अरुण जोशी आचार्य विनोबा भावे एक ऋषितुल्य व्यक्तित्व। केवल चिंतन ही नहीं अपितु चिंतनाधारित कृति ऐसी उनकी प्रगल्भता थी। विनोबाजी मूलतः महाराष्ट्र से…

अनमोल भूमि अमर बलिदान

राघव अभी केवल नौ वर्ष का था। प्रतिदिन अपने ताऊ जी और उनके बेटे माधव के साथ नियमित शाखा जाता।  ताऊ जी ने आज बाल…

अध्ययन क्या है?

 – दिलीप वसंत बेतकेकर अभ्यास ‘अभ्यास’, ‘अध्ययन’ अध्ययन। यह अभ्यास- अध्ययन क्या है? इन शब्दों का उच्चारण दिन रात होता है। शिक्षकों द्वारा तैयार उत्तर…

शिशु शिक्षा 27 – एक से तीन वर्ष के शिशुओं की माताओं का शिक्षण-1

 – नम्रता दत्त शिशु की स्वाभाविक विशेषताएं एक वर्ष से भी कुछ अधिक समय से हम निरन्तर शिशु शिक्षा का अध्ययन कर रहे हैं। शिशु…

बालक के पूर्ण विकास का विज्ञान ‘बाल क्रीडा कर्म’

-डॉ प्रज्ञा शरद देशपांडे चौंसठ कलाओं में से एक और सबसे महत्त्वपूर्ण कला ‘बाल क्रीडा कर्म’ (बच्चों का खेल) है। बाल का अर्थ है- “बलति…

ज्ञान की बात 56 (भाषा का सांस्कृतिक स्वरूप – भाग दो)

 – वासुदेव प्रजापति प्रथम भाग में हमने जाना कि भाषा की मूल इकाई अक्षर है और इसकी व्याप्ति सम्पूर्ण जीवन है। अक्षर के विभिन्न पदार्थों…

पाती बिटिया के नाम-44 (स्वाभिमानी रामतीर्थ)

 – डॉ विकास दवे प्रिय बिटिया! तुमको यह जानकारी तो है ही कि 1813 में शिकागो (अमेरिका) में विश्व स्तरीय सर्वधर्म सम्मेलन सम्पन्न हुआ था।…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 54 (पठनीय विषयों का सांस्कृतिक स्वरूप)

– वासुदेव प्रजापति   भारतीय ज्ञानधारा का मूल अधिष्ठान अध्यात्म है। अध्यात्म जब नियम व व्यवस्था में रूपान्तरित होता है, तब वह धर्म का स्वरूप…

शिशु शिक्षा 21 (जन्म से एक वर्ष के शिशुओं की माताओं का शिक्षण-1)

शिशु की मानसिक आवश्यकतायें एवं स्वाभाविक विकास में परिवार की भूमिका  – नम्रता दत्त अभी तक हम नव दम्पति के शिक्षण पर विचार कर रहे…

भ्रान्तियों के निवारण का महापर्व : आजादी का अमृत महोत्सव – 2

  एक और अटपटा किन्तु विचारणीय प्रश्न जब हम यह चर्चा कर रहे हो कि भारत पराधीन कब हुआ, तो यह विचार करना भी समीचीन…