<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>प्रेरणादायी_सभा Archives - राष्ट्रीय शिक्षा : शिक्षा में समाज प्रबोधन</title>
	<atom:link href="https://rashtriyashiksha.com/tag/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a5%80_%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://rashtriyashiksha.com/tag/प्रेरणादायी_सभा/</link>
	<description>सा विद्या या विमुक्तये</description>
	<lastBuildDate>Tue, 19 May 2026 05:28:31 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	

<image>
	<url>https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/cropped-Logo-Hindi-32x32.png</url>
	<title>प्रेरणादायी_सभा Archives - राष्ट्रीय शिक्षा : शिक्षा में समाज प्रबोधन</title>
	<link>https://rashtriyashiksha.com/tag/प्रेरणादायी_सभा/</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>शालेय प्रार्थना सभा</title>
		<link>https://rashtriyashiksha.com/school-prayer-assembly/</link>
					<comments>https://rashtriyashiksha.com/school-prayer-assembly/#respond</comments>
		
		<dc:creator><![CDATA[राष्ट्रीय शिक्षा]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 19 May 2026 04:03:52 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[दिलीप बेतकेकर]]></category>
		<category><![CDATA[नवीनतम]]></category>
		<category><![CDATA[हम सरस्वती पुत्र]]></category>
		<category><![CDATA[अनुशासन]]></category>
		<category><![CDATA[नैतिक_शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रार्थना_सभा]]></category>
		<category><![CDATA[प्रेरणादायी_सभा]]></category>
		<category><![CDATA[विद्या_भारती]]></category>
		<category><![CDATA[विद्यार्थी_विकास]]></category>
		<category><![CDATA[विद्यालय_जीवन]]></category>
		<category><![CDATA[विद्यालय_संस्कार]]></category>
		<category><![CDATA[शाला_विकास]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा_संस्कार]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://rashtriyashiksha.com/?p=9304</guid>

					<description><![CDATA[<p> &#8211; दिलीप बेतकेकर किसी शाला की प्रगति कम से कम समय में परखनी हो तो शाला की प्रार्थना सभा में उपस्थित रहें। शाला की प्रार्थना सभा शाला के सभी कार्यक्रम,&#8230; </p>
<p>The post <a href="https://rashtriyashiksha.com/school-prayer-assembly/">शालेय प्रार्थना सभा</a> appeared first on <a href="https://rashtriyashiksha.com">राष्ट्रीय शिक्षा : शिक्षा में समाज प्रबोधन</a>.</p>
]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: right;"> &#8211; दिलीप बेतकेकर</p>
<p><img fetchpriority="high" decoding="async" class="alignnone wp-image-9309" src="https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/481016247_1131898572068376_4842360533609575560_n-300x134.jpg" alt="" width="1399" height="625" srcset="https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/481016247_1131898572068376_4842360533609575560_n-300x134.jpg 300w, https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/481016247_1131898572068376_4842360533609575560_n-768x344.jpg 768w" sizes="(max-width: 1399px) 100vw, 1399px" /></p>
<p style="text-align: justify;">किसी शाला की प्रगति कम से कम समय में परखनी हो तो शाला की प्रार्थना सभा में उपस्थित रहें। शाला की प्रार्थना सभा शाला के सभी कार्यक्रम, उपक्रम आदि का प्रतिबिम्ब होती है।</p>
<p style="text-align: justify;">सामान्यतः प्रार्थना सभा 15 से 20 मिनट अवधि की होती है। इस छोटी सी अवधि में भी शाला विकास, शाला का वातावरण, विद्यार्थियों के साथ व्यवहार और शिक्षकों के दृष्टिकोण की जानकारी आसानी से मिल सकती है। इस 15-20 मिनट की सभा का उत्कृष्ट नियोजन कर सकते हैं। कुछ शालाओं में ऐसा नियोजन किया गया है जो अत्यंत प्रभावी है।</p>
<p style="text-align: justify;">कुछ शालाओं में प्रार्थना सभा को एक कर्मकाण्ड की दृष्टि से देखा जाता है। जब किसी बात को उद्देश्य को आंख के समक्ष रखकर, पूर्ण विचार कर, नहीं करते हुए केवल औपचारिकता निभाते हैं, ऐसी सभाओं में जीवन अथवा उद्देश्य दिखाई नहीं देता है। शाला में प्रार्थना सुर-लय विहीन, उदासी लिए हुए चलती है। विद्यार्थियों को भी उसमें कोई गंभीरता नहीं लगती है। शिक्षकों को भी वहां खड़े रहना सजा जैसा लगता है।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रस्तुत लेख में कुछ स्थानों की प्रार्थना सभाओं में जो कुछ अनुकरणीय बातें दिखीं अथवा सुनीं उसे दर्शाने का प्रयास है।</p>
<p style="text-align: justify;">शालाओं में नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया जाए। इस पर दो राय होने का सवाल ही नहीं। केवल किस प्रकार दी जाए, इसके भिन्न-भिन्न मत हैं। प्रार्थना सभा का उपयोग नैतिक शिक्षा के लिए हो सकता है, नैतिक शिक्षा के लिए कोई अलग से पीरियड की आवश्यकता नहीं है। शिक्षा में नैतिक शिक्षा अंतर्निहित ही है। फिर भी प्रार्थना सभा की अवधि में नैतिक शिक्षा के सम्बन्ध में चर्चा हो सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;">शाला प्रारम्भ होने से पूर्व पहली घंटी होते ही सभी छात्रा मैदान में एकत्र हो जाते हैं। अनेक शालाएं ऐसी भी हैं जिनमें खुली जगह/मैदान का अभाव है। शाला में मैदान का होना भी भाग्य की बात है। कुछ शालाओं में प्रार्थना के समय बच्चे कक्षावार कतार में खड़े हो जाते हैं। कहीं ‘हाउस’ अनुसार खड़े होते हैं। सामान्यतः कक्षावार खड़े रहने की ही प्रथा है।</p>
<p style="text-align: justify;">पहली घंटी होने से सभा समाप्त होने तक मौन रखने की प्रथा कुछ शालाएं अपनाती हैं। जिन शिक्षकों, विद्यार्थियों को बोलने का कार्य आवंटित है वे बोलते हैं, शेष मौन रहते हैं। सामान्यतः प्रार्थना सभा का संचालन शारीरिक प्रमुख करता है। कहीं शिक्षक तो कुछ शालाओं में विद्यार्थी संचालन करते हैं। विद्यार्थियों को बदल-बदल कर संचालन का अवसर देना अधिक लाभकारी होगा। प्रार्थना सभा चलते समय कुछ बच्चे पीछे रहकर धींगामस्ती करते हैं, इसलिए आवश्यकतानुसार शिक्षक बच्चों के पीछे खड़े हो जाते हैं। छात्रों का ध्यान भी शिक्षकों की तरफ होता ही है। अनेक बार तो विद्यार्थी शिक्षकों को आपस में बातचीत करते हुए देख लेते हैं। कभी-कभी तो राष्ट्रगीत के चलते भी होता है। ये बातें छात्रों की नजर से छूटती नहीं हैं। कुछ कार्यक्रम प्रतिदिन के निश्चित हैं, जैसे ‘राष्ट्रगीत’! कुछ कार्यक्रम बदलते रहते हैं। ठंड के दिनों में सभा के प्रारंभ में कुछ व्यायाम प्रक्रियाएं अपनाई जाएं तो उपयुक्त रहेगा। प्रार्थना सभा के सभी उपक्रम, कार्यक्रमों का विभाजन, शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक विकास के लिए उपयुक्त होंगे। किसी के द्वारा किए गए अच्छे कार्य के लिए अभिनंदन कार्यक्रम सभा में सभी के समक्ष होने से बच्चे ही क्या बड़े भी आनंदित और उत्साहित होते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">वक्तृत्व, वाचन करने से जनसमूह के समक्ष जाने का अवसर बच्चों को मिलता है। इससे मंचभय या संकोच न रहकर निर्भीक प्रवृत्ति निर्मित होती है। वर्षभर में कभी न कभी प्रत्येक विद्यार्थी को सभा के समक्ष आने का अवसर मिले तो उत्तम है। इस हेतु सुविचार पढ़ना, सुभाषितों का पठन, दिन विशेष बताना, गीत-भजन गा सके, उसे गीत-भजन गाने को कहना, आदि कार्यक्रम सभा में कर सकते हैं। शिक्षकों द्वारा इसकी पूर्व तैयारी करवा लेनी चाहिए।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रार्थना सभा में कोई संकल्प, प्रतिज्ञा बोलने की प्रथा कुछ शालाओं में देखी जाती है। एक शाला में विविध भाषाओं में प्रतिज्ञा बोलना होता है जो स्तुत्य है। इससे दूसरी भाषाओं का सम्मान करने की प्रवृत्ति निर्मित होगी। सप्ताह में एक बार बोधकथा कहने का कार्यक्रम रख सकते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">कहा जाता है – “Tell me the songs on the lips of the young people of the country and I will tell you the future of the country.”</p>
<p style="text-align: justify;">आजकल हमारे यहां बच्चों के मुंह से फिल्मी गाने ही गुनगुनाए जाते हैं। ऐसी शिकायत करने की अपेक्षा कुछ शालाएं बच्चों को देशभक्ति परक गीत सिखाने का उपक्रम करती हैं। दस-पंद्रह बार एक ही गीत दोहराने पर याद हो जाता है। वर्षभर की अवधि में न्यूनतम दस गीत शाला द्वारा याद करवाए जा सकते हैं। ये गीत विविध भारतीय भाषाओं के हो सकते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">संस्कृत एक सम्पन्न भाषा है किंतु आज उसका स्थान कहां है? न्यूनतम शब्दों में विचार प्रस्तुत करना संस्कृत सुभाषितां का वैशिष्ट्य है। संस्कृत भाषा के परिचय के लिए दो पंक्तियों के सुभाषित याद करवाने होंगे। पंद्रह दिन में सुभाषित याद हो जाएगा। वर्ष भर में दस-पंद्रह सुभाषित आसानी से याद हो जाएंगे। निबन्ध लिखने या वक्तृत्व स्पर्धा में इन संस्कृत सुभाषितों का उपयोग करना प्रभावी रहेगा।</p>
<p><img decoding="async" class="alignnone wp-image-9306" src="https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/5.2-1-300x167.jpg" alt="" width="1412" height="786" srcset="https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/5.2-1-300x167.jpg 300w, https://rashtriyashiksha.com/wp-content/uploads/2026/05/5.2-1.jpg 688w" sizes="(max-width: 1412px) 100vw, 1412px" /></p>
<p style="text-align: justify;">‘दिन विशेष’ पुस्तक खोलते ही प्रत्येक दिन के महत्व की जानकारी सामने दिखाई देती है। कौन-कौन सी घटनाएं उस दिन हुईं, यह जान सकते हैं। सप्ताह में एक दिन विशेषकर शनिवार को सामूहिक व्यायाम (P.T.) करवाने की प्रथा कुछ शालाओं में है। आज इस भावना को अपनाने की आवश्यकता है। कवायद से शरीर को ही नहीं, मन के लिए भी अच्छा मार्ग प्रशस्त होता है।</p>
<p style="text-align: justify;">अनेक बार देखा जाता है कि कुछ बालक अस्वच्छ हाथ-पैर, नाखून बढ़े हुए, गंदे जूते या चप्पल, बिखरे बाल, ऐसी अवस्था में शाला में आते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे विद्यार्थियों का बारीकी से परीक्षण सप्ताह में एक बार होना आवश्यक है। सभी शिक्षक यह कार्य एकत्रित होकर करें तो यह परीक्षण आसानी से हो जाएगा। कम से कम इस ‘रूप’ में शाला आना बंद होगा। वे अपेक्षानुरूप आने लगेंगे। अपेक्षित गणवेश में विद्यार्थी आये हैं अथवा नहीं, यह परीक्षण से स्पष्ट हो जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">सालों-साल एक ही प्रकार से ही प्रार्थना सभा करने से वे निर्जीव, उबाऊ, उदासी भरी, अप्रिय लगने लगती हैं। चैतन्यभरी दिखने के लिए सभा की योजना विचारपूर्वक करनी पड़ेगी।</p>
<p style="text-align: justify;">कुछ शालाएं, शिक्षक इस विषय में जागरुक हैं। क्या करना है, क्या नहीं होना है, इसका विचार वे पूर्व से ही बारीकी से करते हैं। ऐसी शालाएं कम ही हैं। कुछ लोगों को कुछ करने की इच्छा होती है परन्तु कल्पनाशीलता नहीं होती। जिन्हें कुछ करने की इच्छा है, उन्हें अन्य शालाओं का अनुकरण करना चाहिए। प्रार्थना सभा की ओर अर्थपूर्ण दृष्टि से देखा जाए तो अति उत्तम रहेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">(लेखक शिक्षाविद, स्वतंत्र लेखक, चिन्तक व विचारक है<strong>।)</strong></p>
<p><strong>और पढ़ें : <a href="https://rashtriyashiksha.com/need-of-teachers-for-students/" target="_blank" rel="noopener">‘विद्यार्थियों’ के शिक्षकों की आवश्यकता</a></strong></p>
<p>The post <a href="https://rashtriyashiksha.com/school-prayer-assembly/">शालेय प्रार्थना सभा</a> appeared first on <a href="https://rashtriyashiksha.com">राष्ट्रीय शिक्षा : शिक्षा में समाज प्रबोधन</a>.</p>
]]></content:encoded>
					
					<wfw:commentRss>https://rashtriyashiksha.com/school-prayer-assembly/feed/</wfw:commentRss>
			<slash:comments>0</slash:comments>
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
