वह अमर छलांग – स्वातंत्र्यवीर विनायक दामोदर सावरकर

 – गोपाल महेश्वरी पानी पर लिखी हुई बातें लिखते- लिखते बह जाती हैं। नहीं शेष उनकी किंचित स्मृतियाँ भी रह जाती हैं। पर एक सदी…