✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों ने हमारी देशी शिक्षा व्यवस्था की पूर्ण उपेक्षा करने की नीति अपनाई। उस समय ब्रिटेन के सामने न तो सार्वजनिक शिक्षा…
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भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 77 (शासनाधीन शिक्षा के दुष्प्रभाव)
✍ वासुदेव प्रजापति हमारे देश में अंग्रेजों के आने तक शिक्षा कभी भी शासन के अधीन नहीं रही। अंग्रेजों ने भारतीय शिक्षा को शासन के…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 75 (स्वायत्त शिक्षा व्यवस्था का नाश)
✍ वासुदेव प्रजापति अंग्रेजों के भारत में आने तक हमारी शिक्षा व्यवस्था स्वायत्त थी। शिक्षा शिक्षक के अधीन थी और समाज के पोषण से चलती…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 73 (भारतीय शिक्षा और अंग्रेजी षडयंत्र)
✍ वासुदेव प्रजापति “ज्ञान की बात” राष्ट्रीय शिक्षा डॉटकॉम पर प्रसारित होने वाला एक पाक्षिक स्तम्भ है। इसमें भारतीय शिक्षा की मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 72 (स्वायत्त शिक्षा भाग २)
✍वासुदेव प्रजापति स्वायत्त शिक्षा भाग १ में हमने यह जाना कि स्वायत्तता अंग्रेजी शब्द ओटोनोमी का अनुवाद है। इसलिए ओटोनोमी का अर्थ ही स्वायत्तता पर…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 71 (स्वायत्त शिक्षा भाग १)
– वासुदेव प्रजापति शिक्षा में स्वायत्तता और स्वतंत्रता की माँग अनेक शिक्षाविद और शैक्षिक संगठन समय-समय पर करते हुए सुनाई देते हैं, किन्तु स्वायत्तता प्राप्त…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 68 (औपचारिक-अनौपचारिक शिक्षा तंत्र)
– वासुदेव प्रजापति आज शिक्षा क्षेत्र में औपचारिक और अनौपचारिक शब्दों का प्रयोग बहुत होता है, किन्तु इन दोनों शब्दों के सही अर्थ के बारे…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 67 (शिक्षित समाज)
– वासुदेव प्रजापति जिस समाज में जितने अधिक शिक्षित व्यक्ति होते हैं, वह समाज उतना ही अधिक विकसित होता है। एक शिक्षित व्यक्ति अपनी भाषा…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 66 (शिक्षित व्यक्ति)
– वासुदेव प्रजापति हमारे समाज में शिक्षित व्यक्ति का महत्त्व सदैव रहा है। यदि कोई व्यक्ति अशिक्षित है, तो समाज में उसे कभी मान-सम्मान प्राप्त…
भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात 65 (शास्त्र की शिक्षा)
– वासुदेव प्रजापति जीवन में जितनी महत्त्वपूर्ण मन की शिक्षा और कर्म की शिक्षा है, उतनी ही महत्त्वपूर्ण शास्त्र की शिक्षा भी है। जहाँ मन…