बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा-1

अप्रैल मास में राजगीर (बिहार) में विद्या भारती की राष्ट्रीय साधारण सभा के समापन सत्र में मा. काशीपति जी राष्ट्रीय संगठन मंत्री द्वारा उद्बोधन में ‘बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा’ इस विषय का जिक्र हुआ। पिछले दिनों मा. काशीपति जी का हरियाणा प्रवास हुआ। तीन विद्यालयों में उनके द्वारा लिए गए विषय व करवायी गयी गतिविधि एवं बाद में हुई चर्चा से ध्यान में आया कि उपरोक्त विषय क्या है? कुछ विद्यालयों में प्रवास के दौरान वैसा स्वयं करवा कर देखा। अनुभव अच्छा आया। इस दौरान ध्यान आया कि इस विषय पर लेखन होना चाहिए। आपके सामने स्तम्भ रूप में उपस्थित है। व्यावहारिक बातों को स्वयं अनुभव करते हुए आपके साथ विचार सांझा करने का प्रयास है।

सामान्यतः छोटी कक्षाओं में गणित में गिनती सिखायी जाती है। सिखाने का तरीका सब जगह परम्परागत है। गिनती बालक को जीवनभर उपयोग करनी है। एक विद्यालय में दूसरी व तीसरी कक्षा के छात्रों को बुलाया गया। उनसे गिनती 1 से 100 तक सुनी गयी। सभी ने सुनायी। फिर एक बालक को अपनी कक्षा के छात्रों को गिनने को कहा गया। उसने गिना। दूसरे छात्र (तीसरी कक्षा) को भी यही कहा गया। उसने भी गिना। फिर एक बालक को दोनों कक्षा के छात्रों को गिनने को कहा। इसी प्रकार क्रमश: वहाँ बैठे आचार्य, अधिकारी सहित छात्र, कक्ष में लगे चित्र, खिड़की, दरवाजे, फर्नीचर, विद्यालय के कक्ष, दरवाजे, आचार्य-भैया, दीदी, आदि गिनने को कहा। अलग-अलग बालकों ने गिना। अन्त में अपने आप को एक-एक अंक बोलते हुए गिना गया।

इस गतिविधि के दौरान ध्यान में आया कि बालक गिनते समय अपनी आँख, कान, मुंह, अंगुली का उपयोग करता है। सभी बालकों के मन में उत्सुकता, आनन्द, सहजभाव। सभी की सहभागिता। किसी ने गलत गिना तो कोई डांट नहीं। दूसरों के द्वारा गिनने पर स्वतः अनुभव हुआ कि गलत गिना। सभी का ध्यान गिनने पर। इस तरह गिनती का व्यावहारिक प्रयोग सभी ने सीखा। मैंने ज्यादा नहीं बोला बल्कि काफी कम बोलना पड़ा, और बालकों ने अधिक सीखा। एक बालक ऐसा भी था जो सामान्यतः कक्षा में कमजोर रहता है परन्तु गतिविधि के दौरान अग्रणी था।

शिक्षा में दो प्रकार आते है

(1) Education By Teaching,

(2) Education by Learning

आजकल Education by Teaching का सर्वत्र प्रचलन है किन्तु प्राचीन भारतीय शिक्षा पद्धति में Education by Learning अपने आपसे सीखना, अनुभव से व स्वयं करके सीखने की व्यवस्था है। स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा है। ‘‘शिक्षा मनुष्य में अन्तर्निहित पूर्णता की अभिव्यक्ति है’’ “Education is the Manifestation of perfection already in the Men” उपरोक्त गतिविधि प्राचीन भारतीय शिक्षा का स्वरूप Education By Learning तथा पूर्णता की अभिव्यक्ति को पुष्ट करती है। यही है ‘बाल केन्द्रित क्रिया आधारित शिक्षा’।

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