कैसे अंग्रेजों ने ध्वस्त की भारत की विकसित शिक्षा प्रणाली : आओ जाने – 2

– प्रशांत पोळ ऑस्ट्रिया के एक मिशनरी, जॉन फिलिप वेस्डिन, अठारहवीं शताब्दी के अंत में केरल के मलाबार में काम कर रहे थे। । वर्ष…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-36 (राष्ट्रगत विकास)

 – वासुदेव प्रजापति व्यष्टि और समष्टि के सम्बन्धों के अन्तर्गत हमने व्यक्ति और परिवार तथा व्यक्ति और समाज के सम्बन्धों को जाना। आज हम व्यक्ति…

नदियों के मर्म को सुनना ही होगा

 – डॉ० रविन्द्र नाथ तिवारी नदियों के देश कहे जाने वाले भारत में मुख्यतः चार नदी प्रणालियाँ हैं। उत्तर भारत में सिंधु, मध्य भारत में…

कोरोना महामारी के कारण भारतीय जीवन शैली की चर्चा

 – रवि कुमार कोरोना महामारी से फैले संकट से देश व विश्व उभरने का प्रयास सतत कर रहा है। एक वर्ष से अधिक हो गया…

1857 का राष्ट्रीय स्वतन्त्रता संग्राम : एक विश्लेषण

– डॉ कुलदीप मेहंदीरत्ता 1857 का स्वतन्त्रता संग्राम पूरे भारत के नागरिकों के लिए उनके पूर्वजों के संघर्ष की वह कहानी है जिसका सारे विश्व…

कैसे अंग्रेजों ने ध्वस्त की भारत की विकसित शिक्षा प्रणाली : आओ जाने – 1

 – प्रशांत पोळ हमारे देश में शिक्षा व्यवस्था तथा पाठशालाएं अंग्रेजों ने प्रारंभ की, ऐसा कहा जाता है। अंग्रेज़ आने के पहले देश में शिक्षा…

श्रीराम – सुशासन के प्रतीक महापुरुष

भगवान श्रीराम अविनाशी परमात्मा है जो सबके सृजनहार व पालनहार हैं। भारत में ही नहीं, दुनिया में श्रीराम अत्यंत पूजनीय हैं और आदर्श पुरुष हैं।

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-31 (विज्ञानमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति विज्ञानं ब्रह्मेति व्यजानात् अपने पिता की आज्ञा पाकर भृगु ने तप किया, और तप करके जाना कि विज्ञान स्वरूप चेतन जीवात्मा ही…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-30 (मनोमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति मनो ब्रह्मेति व्यजानात् आपके ध्यान में आया होगा कि एक ही कथा निरन्तर चल रही है। पुत्र भृगु अपने पिता वरुण के…

भारतीय शिक्षा – ज्ञान की बात-29 (प्राणमय कोश का विकास)

 – वासुदेव प्रजापति प्राणों ब्रह्मेति व्यजानात् इससे पूर्व की कथा में पिता वरुण के कहने पर भृगु ने तप किया और तप करके जाना कि…