सा विद्या या विमुक्तये
– अवनीश भटनागर प्रख्यात रूसी साहित्यकार लियो टॉल्सटॉय (1828-1910) ने लिखा है, “शिक्षाशास्त्र बहुत कुछ आधुनिक चिकित्साशास्त्र जैसा है, जो हमें बताता है कि प्रकृति…
– अवनीश भटनागर क्षमता अर्थात् किसी-किसी में जन्मजात होती है कोई-कोई विकसित करने का प्रयास करता है। उनमें भी कोई-कोई सफल होता है। किसी अन्य…
– अवनीश भटनागर शिक्षा के समक्ष चुनौती : आजकल वाट्सप पर अनेक सन्देश आते हैं । मेरे एक मित्र ने मुझे एक मेसेज भेजा, मैं…
– अवनीश भटनागर पंचकोशात्मक विकास भारत में शिक्षा जीवन विकास के लिए दी जाती रही है । उपनिषद् में व्यक्ति का व्यक्त्त्वि पंचकोशात्मक बताया है…
– अवनीश भटनागर शिक्षा एक ऐसा पक्ष है, जिससे किसी भी राष्ट्र की प्रगति या अवनति जुड़ी हुई है । राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में…
भारत जैसे विशाल देश में, जहाँ संविधान में 18 भाषाओं को आठवीं अनुसूची में रखा गया है और 800 से अधिक भाषाएँ बोली-समझी जाती हों,…
On the occasion of the 150th birth anniversary of Swami Vivekananda being celebrated all over the country and the World, it is the high time…
शिक्षा की प्रक्रिया के माध्यम से ही मानव शिशु का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास होकर वह समाज में उपयुक्त स्थान ग्रहण करता…
-अवनीश भटनागर ‘संयममय जीवन हो’ – यह गीत अनुप्राणित करता है, प्रेरणा देता है, जीवन की दृष्टि देता है । परन्तु जरा निष्पक्ष आत्म समीक्षा…
– अवनीश भटनागर शिक्षा जीवन के विकास की यात्रा है। व्यक्तित्व के विकास का एक मात्र माध्यम शिक्षा ही है। विश्वभर के शिक्षाविद् कहते हैं…