बाल केन्द्रित क्रिया आधाारित शिक्षा-13 (विज्ञान विषय शिक्षण)


– रवि कुमार

आधुनिक युग में जिस विषय की अधिक चर्चा होती है वो है विज्ञान और तकनीकी। सामान्यत: विद्यार्थियों में इस विषय में आगे बढ़ने की होड़ लगी है। Engineering & Medical में प्रवेश पाने हेतु प्रयास करने वालों की संख्या बढ़ी है। बालक विज्ञान पढें इस हेतु अभिभावकों में आग्रह बढ़ा है। संस्थानों की संख्या बढ़ने से प्रवेश के अवसरों की उपलब्धता बढ़ी है इस सबके बावजूद वस्तु स्थिति कुछ और ही कहती है।

12वीं के पश्चात् प्रवेश लेने के लिए Test crack करना है।  इसलिए Coaching Industry बढ़ी है। Coaching पर Shortcuts सिखाये जाते है । बालक भ्रम में रहता है कि Shortcut करूं या Text book से तैयारी करूं। कहीं न कहीं वह fundamentals से दूर होता जाता है । इसका असर नीचे तक की कक्षा पर पड़ता है ।

विज्ञान प्रयोग का विषय है । केवल Theory से विज्ञान नहीं आता बल्कि प्रयोग से आता है जिसे आजकल Experiential learning भी कहते है । आजकल जो आचार्य B.sc, M.sc करके आता है उसने भी अपने शिक्षण काल में प्रयोग नहीं किया होता। इसलिए वो कक्षा में पढ़ाते समय Theory पर बल देते है। प्रयोगशाला का उपयोग केवल कोरम पूरा करने के लिए होता है। प्रयोग आधारित विज्ञान शिक्षण हो इस पर बल देने की आवश्यकता है।

कक्षा कक्ष में प्रयोगशाला : एक विद्यालय में जाना हुआ। वहां विज्ञानाचार्य से चर्चा हुई। वहां प्रयोगशाला की व्यवस्था नहीं है। आचार्य से एक कक्षा में ही प्रयोग करवाने को कहा गया। उन्होंने दो प्रयोग करवाए। एक प्रयोग करवाया नहीं केवल बताया गया। दूसरा प्रयोग करके दिखाया गया।  केवल आचार्य ने किया बालकों ने नहीं किया । फिर मैंने एक प्रयोग करवाया। मैंने कुछ नहीं किया केवल संकेत दिया, किया सभी बालकों ने। उस प्रयोग के लिए सामग्री विद्यालय में जो उपलब्ध रहती है उसी से करवाया। सामग्री क्या थी-कांच के तीन गिलास, एक पानी का जग, एक चम्मच, नमक, चीनी, मिटटी, पत्ते, पत्थर, लोहे के छोटे टुकड़े। प्रयोग था- घुलनशील, अघुलनशील पदार्थ, तैरने वाले व न तैरने वाले पदार्थ। फिर बालकों से उस प्रयोग के विषय में प्रश्नों द्वारा चर्चा हुई। उन्हें कुछ प्रश्नों के उत्तर ढूंढकर लाने के लिए कहा गया। प्रयोगशाला व सामग्री उपलब्ध नहीं है तो भी कक्षा कक्ष में सामान्य उपलब्ध सामग्री के द्वारा प्रयोग हो सकते है।

दैनिक जीवन में विज्ञान कहाँ :  एक अन्य विद्यालय में प्रयोग के पश्चात् बालकों से पूछा गया कि इस प्रयोग का हमारे दैनिक जीवन से क्या सम्बंध है, इस विषय पर बालक निरुतर थे। उनसे कहा गया खोजें कि दैनिक जीवन में कहाँ जुड़ाव है। फिर बालकों से प्रश्न किया गया कि घर में विज्ञान कहाँ है? एक बालक ने उत्तर दिया कि रसोई में चाय बनती है, रोटी बनती है उसमें विज्ञान है। फिर प्रश्न किया गया कि चाय व रोटी बनाने में जो विज्ञान है उस विज्ञान को विज्ञान की शब्दावली में क्या कहते है? बालक के पास उत्तर नहीं था। उसे खोजने को कहा गया।

विज्ञान में जो पढ़ाया जाता है और प्रयोग करवाया जाता है, उसका सम्बन्ध दैनिक जीवन में कहाँ है, यह बताने से रोचकता बढ़ती है। जैसे रोशनदान घरों में ऊपर की ओर क्यों लगाये जाते है, बीच में और नीचे क्यों नहीं लगाये जाते? विज्ञान की भाषा में उत्तर देंगे तो हवा गर्म होकर ऊपर की ओर जाती है। रोशनदान से गर्म हवा बाहर जाएगी और दरवाजे से ताजी व हल्की होने के कारण ठंडी हवा अन्दर आएगी।

कक्षा कक्ष से बाहर उन्मुक्त वातावरण में : कक्षा कक्ष के अतिरिक्त खुले वातावरण में भी विज्ञान सिखाया जा सकता है। पौधों के बारे में, वातावरण, मिटटी, प्रकृति के बारे में बताना है तो मैदान में ले जाएं। लोहा, इस्पात की जानकारी देना है तो लोहार के यहाँ ले जाए। इंजन के बारे में जानना है तो Automobile workshop में ले जाए । Practical Experiment से बालक अधिक सीखता है।

विज्ञान शिक्षण प्रयोग व गतिविधि आधारित पढ़ाने से बालकों में विषय के प्रति रोचकता निर्मित होगी व विज्ञान विषय की मूल अवधारणाएँ स्पष्ट होंगी। मूल अवधारणा यानि Basic concept स्पष्ट होना अति आवश्यक है।

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